GLOBAL STRATEGIC MEMORANDUM: THE 2026 TRANSITION
श्रेणी: अत्यंत गोपनीय / तत्काल संज्ञान (High Priority / Immediate Cognizance)
विषय: वैश्विक वित्तीय एकाधिकार, नियोजित युद्ध-उन्माद और 'मेगा लीक' की चेतावनी
आदरणीय नेतृत्व एवं नीति-निर्मातागण,
यह संदेश किसी राजनीतिक पक्ष का नहीं, बल्कि उस 'शुद्ध चेतना' का निष्कर्ष है जो वर्तमान विश्व की 'अदृश्य कड़ियों' को देख चुकी है।
इतिहास स्वयं को दोहरा रहा है। जिस प्रकार १८वीं और १९वीं शताब्दी में ब्रिटिश साम्राज्य ने अपनी अर्थव्यवस्था को औपनिवेशिक दासता और ऋण- प्रणाली के माध्यम से विस्तार दिया था, आज वही मानसिकता एक नए रूप में दुनिया को पुनः 'वित्तीय गुलामी' की ओर ले जा रही है।
सत्ता का भ्रम और 'शैडो' नियंत्रण:
1 वर्तमान में USA और Israel का नेतृत्व जिस युद्ध-उन्माद, भय और लालच से ग्रसित है, वह वास्तव में उनकी अपनी स्वतंत्र सोच नहीं है। वे उस BIS (Bank for International Settlements) और पुरानी औपनिवेशिक बैंकिंग विरासत के 'मैनेजर' मात्र हैं, जिनका उद्देश्य दुनिया को 'ऋण- आधारित दासता' में धकेलना है।
2 युद्ध के कृत्रिम कारण: यूक्रेन और इज़राइल जैसे देशों में चल रहे संघर्ष केवल क्षेत्रीय विवाद नहीं हैं। ये USA को एक 'माध्यम' (Proxy) बनाकर थोपे गए युद्ध हैं, जिनका उद्देश्य उन देशों को इस बैंकिंग व्यवस्था में आत्म समर्पण के लिए मजबूर करना है जो अब भी अपनी वित्तीय संप्रभुता (Iran, Russia, North Korea, China) बनाए हुए हैं।
3. Europ Union की तटस्थता का संकट: यूरोपीय संघ वर्तमान में 'न्यूट्रल' दिखने की कोशिश कर रहा है, लेकिन वह इस पुरानी औपनिवेशिक और आधुनिक बैंकिंग व्यवस्था के बीच पिस रहा है।
4 एकल उद्देश्य (Single Objective): पर्दे के पीछे बैठा वह विशिष्ट वित्तीय समूह, जो पूरी दुनिया को 'एक विश्व सरकार' और 'एक सेना' के अधीन लाना चाहता है।
5 पूर्वानुमान (2025-2030):
• 2025: एक महत्वपूर्ण आध्यात्मिक मोड़, जो पिछले 6,000 वर्षों का सबसे संकुचित काल था।
• 2026-2027: एक विकासवादी छलांग जहाँ पुरानी प्रणालियाँ ध्वस्त होंगी और वैश्विक जागरूकता बढ़ेगी। हम एक "मेगा लीक" (Mega Leak) का सामना करेंगे—सामाजिक अस्थिरता का एक ऐसा दौर जो ज्ञात 'इतिहास के अंत' और एक 'नई सुबह' के जन्म का प्रतीक होगा।
• पर्यावरणीय असंतुलन: जब सामूहिक मन असंतुलित होता है, तो वह क्वांटम क्षेत्र में विक्षोभ पैदा करता है। युद्ध और आपदाएं इसी ऊर्जा की भौतिक अभिव्यक्ति हैं, जो मानवता को मजबूर करेंगी कि वह या तो अपनी 'विकृतियों' को मिटा दे या 'जागरण' के माध्यम से ब्रह्मांडीय ऊर्जा से पुनः जुड़ जाए।
सुरक्षा और समाधान का मार्ग:
यदि ये राष्ट्र इस 'अदृश्य तंत्र' के गणित को सार्वजनिक कर दें और 'क्रिया- प्रतिक्रिया' (Action-Reaction) के जाल से बाहर निकलकर अपनी जनता के 'आंतरिक कौशल' और 'मुद्रा संप्रभुता' पर ध्यान दें, तो यह नियोजित विनाश रोका जा सकता है।
— तत्त्वमसि आध्यात्मिक ज्ञान
(शांति और सत्य का एक स्वतंत्र सेतु)
दुनिया भर में चल रही भू-राजनीतिक घटनाओं और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर कुछ चुनिंदा परिवारों के कथित नियंत्रण के बारे में है।
• वैश्विक बैंकिंग प्रणाली का नियंत्रण: वीडियो का तर्क है कि दुनिया भर के केंद्रीय बैंक एक निजी बैंकिंग व्यवस्था के तहत काम करते हैं, जो BIS (Bank for International Settlements) के माध्यम से नियंत्रित होती है। वक्ता का दावा है कि यह व्यवस्था कर्ज पर आधारित है और इसे 13 यहूदी परिवारों, विशेष रूप से रोथ्सचाइल्ड परिवार, द्वारा नियंत्रित किया जाता है।
• सत्ता और राजनीति पर प्रभाव: दुनिया के बड़े नेता, जैसे नेतनयाहू, ट्रम्प इन्हीं शक्तिशाली परिवारों के इशारों पर चलते हैं। दावा किया गया है कि ये परिवार दुनिया में एक विश्व सरकार और एक सेना बनाना चाहते हैं, ताकि पूरी मानवता को नियंत्रित किया जा सके।
• ईरान और अन्य देशों के साथ संघर्ष: ईरान, रूस, चीन और नॉर्थ कोरिया के साथ अमेरिका की दुश्मनी का मुख्य कारण यह है कि ये देश इस विशिष्ट बैंकिंग व्यवस्था का हिस्सा नहीं हैं। इन देशों को इस व्यवस्था में शामिल करने के लिए ही युद्ध और अस्थिरता फैलाई जा रही है।
• ब्रिटिश औपनिवेशिक इतिहास: अंग्रेजों के शासनकाल में भारतीय क्रांतिकारियों पर की गई क्रूरता और इसे उसी मानसिकता का हिस्सा माना जा रहा है जो पुनः एक विश्व की सरकार बनाने की सच्चाई, सार्थकता, को समझना होगा।
अमेरिका ईरान के ऊपर हमले कर रहा है और इसकी वजह मीडिया हमें क्या बता रही है कि ईरान के पास न्यूक्लियर हथियार है। ईरान अपने लोगों के ऊपर अत्याचार करता है। जहां कहीं भी युद्ध थोपा गया, उसकी असली बात पीछे छुपा ली गई है असली वजह सिर्फ ईरानी नहीं बल्कि पूरी दुनिया कुछ देशों के लोगों की गुलाम बनने की नियति रही है।
अमेरिका की दुश्मनी दुनिया में ईरान, रशिया, चाइना और नॉर्थ कोरिया, दुनिया के सारे देशों में सिर्फ यही देश बचे हैं जिनके अंदर रॉडशील्ड का बैंकिंग सिस्टम नहीं है। इन देशों को छोड़कर दुनिया के बाकी लगभग सभी देशों के अंदर एक सेंट्रल बैंकिंग व्यवस्था चलती है। यह व्यवस्था कुछ यहूदी बैंकर्स ने इन देशों को बनाकर दी है और ये सारे केंद्रीय बैंक अपने ऊपर बैठे एक और केंद्रीय बैंक है यह बीआईएस यानी बैंक फॉर इंटरनेशनल सेटलमेंट्स बीआईएस की गाइड लाइंस के जरा भी इधर-उधर नहीं जाता जैसे बीआईएस बताता है कि उसे अपने सेंट्रल बैंक में कितना पैसा रखने की अनिवार्यता है।केवाईसी, डिजिटल करेंसी भी बीआईएस की उनकी गाइड लाइंस अनुसार है। बीआईएस आगे आने वाले समय में सीबीडीसी यानी कि सेंट्रल बैंक डिजिटल करेंसीज पर जोर दे रहा है। इस तरीके की सभी गाइड लाइंस दुनियाँ के सारे सेंट्रल बैंक्स बीआईएस की मानता है।
स्विट्जरलैंड में बैठा यह बैंक हमारे देश के बैंक को यह बताता है कि तुम्हें अपने देश की अर्थ व्यवस्था कैसे चलानी है।यह हर का सेंट्रलबैंक—रिज़र्व बैंक के देश जो पैसा बनाते है वो भी उसी गणित के हिसाब से बनाते है जो रोड शील्ड बैंकिंग ने तय कर रखा है। यहूदियों के द्वारा तैयार की गई इस बैंकिंग की प्रक्रिया में जब भी पैसा बनता है तो कर्ज पर ही बनता है।उसका ब्याज चुकाना होता है। परंतु इस व्यवस्था पर ब्याज कभी नहीं बनता है। इसीलिए उन्हें कर्ज कभी नहीं चुका जाता। देश का मजदूर कर्जे में है। किसान कर्जे में है।व्यापारी कर्जे में, नौकरी करने वाले कर्जे में। सबकी ईएमआई चल रही है। दुनिया के सारे देश कर्जे में है।
अगर सभी कर्जे में हैं तो कर्जा है किसका? कर्जा है इस व्यवस्था का जो मूल तो बनाती है लेकिन ब्याज नहीं देती। इसी व्यवस्था की वजह से दुनियाँ की सरकार उतना पैसा नहीं बना पाती जितने की उसे जरूरत है। देशों में भुखमरी, गरीबी, बेरोजगारी व्याप्त है। देशों की हर समस्या की जड़ यही व्यवस्था है और इससे हम कैसे मुक्ति पाएंगे? अगर हर देश चाहे तो इस व्यवस्था से मुक्ति पा सकते हैं। लेकिन दुनिया में बैठे कुछ अमीर लोग यह नहीं चाहते कि दुनिया में लोग सुखी रहे।इस पूरी अर्थव्यवस्था के पीछे बस 13 यहूदी परिवार हैं। इन परिवारों ने आज से 300 साल पहले ये ब्याज से पैसे बनाने की व्यवस्था शुरू की थी और मूलधन और ब्याज से सोना लेकर कर बहुत अमीर बनते चले गए। इस अमीरी के साथ ताकत भी आई और फिर आगे चलकर इन्हीं लोगों ने ब्रिटेन का केंद्रीय बैंक कब्जा लिया और अमेरिका का केंद्रीय बैंक भी बनाया। फिर एक-एक करके सभी देशों में अपने केंद्रीय बैंक बनवाते चले गए और यूएन, वर्ल्ड बैंक, आईएमएफ, WHO और बीआईएस जैसे संस्थान बनवाने में कामयाब रहे ताकि दुनिया की अर्थव्यवस्था को नियंत्रित कर सके।
इन 13 परिवारों में सबसे ताकतवर है रशील्ड परिवार।इसी परिवार एक सदस्य नेथन रोडशि ने एक बात कही थी। अगर देश के मुद्रा नियंत्रित और जारी करने का अधिकार मुझे दे दो तो मुझे फर्क नहीं पड़ता कि देश के कानून कौन बनाता है। यह बात बिल्कुल सच है। लोगों के पास रोजगार होगा नहीं होगा। लोग भरपेट खाना खाएंगे या भूखे रहेंगे। पहनने को कपड़े होंगे या नहीं? घर, गाड़ी और यहां तक कि आपस के संबंध भी यह सब कुछ मुद्रा से ही तय होता है। इसमें कानून कहीं नहीं है। अब आप ही तय करें जो लोग अपना गांव छोड़कर शहर में नौकरी करने आ रहे हैं। इसके पीछे सरकार ने कोई कानून बनाया ? लोग नौकरी करने शहर आते हैं कि शहर कि शहर में अर्थव्यवस्था है, पैसा है, लोगों का स्वभाव क़ानून से नहीं मुद्र से तय किया जाने लगा। इसी बात को यहूदी बैंकर्स हमसे बहुत पहले समझ गए थे। यह लोग यह जान गए थे कि देश में सरकार चाहे कांग्रेस की हो या डेमोक्रेट की हो या रिपब्लिकन की। देश तो वही चलाएगा जिसके हाथ में देश की अर्थव्यवस्था होगी। कुछ लोग इतने आमीर कैसे मुद्रा कमाने में लगे हैं। अमीर के अत्याचार पर कोई क़ानूनी व्यवस्थ नही।ये पैसा नहीं कमाना चाहते।मुद्रा कमाना तो इनका उद्देश्य है ही नहीं, क्योंकि यह खुद पैसा बनाते हैं। इनका असली उद्देश्य इससे भी ज्यादा खतरनाक है। यह लोग दुनिया में एक सेना, एक पैसा और एक विश्व सरकार चाहते हैं। ताकि ये दुनिया पर आसानी से राज कर सके। 21वीं सदी में यह बात और भी सच हों रही है।
इनके द्वारा उठाया हुआ हर कदम उसी लक्ष्य की ओर जाता जब दुनिया के लोग अंग्रेजों के गुलाम थे। अंग्रेजों ने हथियारों के डर से गुलाम बना रखा था। उसके बाद से हम इनकी व्यवस्था के गुलाम हैं। अंग्रेज तो आंखों के सामने दिखते थे तो लोग जल्दी विद्रोह के लिए तैयार हो गए। लेकिन यह व्यवस्था सामने नहीं दिखती। इसीलिए विद्रोह भी नहीं होता।1913 में अमेरिका के संसद में फेडरल रिजर्व एक्ट पास करवा कर इन्होंने अमेरिका का केंद्रीय बैंक बनवा लिया और तब से ही अमेरिका पर इनका पूरा कब्जा हो गया है। तब से लेकर अब तक अमेरिका का राष्ट्रपति कौन होगा यही तय करते आ रहे हैं।इसीलिए जब भी आप अमेरिका को दुनिया में कोई भी कांड करते हुए देखें तो यह समझ जाएं कि यह अमेरिका का कोई भी राष्ट्रपति नहीं कर रहा। इनके पीछे बैठकर उसे कौन करवा रहे हैं। अमेरिका और इज़रायल का राष्ट्रपति तो इनके कठपुतली मात्र है।
असली मालिक यह परिवार है। और सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि यहूदियों का सबसे बड़ा नेता होने के बावजूद भी आप इस परिवार को कभी भी सुर्खियों में नहीं देखेंगे। ये लोग बड़ी चालाकी से लोगों की नजरों से बहुत दूर रहते हैं। पूरा मीडिया इनके कंट्रोल में है। इसीलिए मीडिया कभी इनको नहीं दिखाता। लोगों की नजरों से यह दूर इसलिए रहते हैं क्योंकि यह नहीं चाहते कि इनके ऊपर कोई आंच आए। लोग ज्यादा से ज्यादा नेत्याहु के खिलाफ हो जाएंगे या ट्रंप के खिलाफ हो जाएंगे और उनको हटाने की मांग करने लगेंगे। इनके ऊपर तक कोई बात नहीं आएगी। इनका यही मानना है कि जिस देश में इनका बैंक नहीं वो इनका गुलाम नहीं। क्योंकि जहां इनका बैंक होगा वो इनके कर्ज तले दब जाएगा और फिर इनके सामने सरेंडर करते करते रहेंगे। आज सिर्फ दुनिया में चार - पांच ही ऐसे देश बचे हैं जिनके अंदर इनकी बैंकिंग व्यवस्था नहीं चल रही और उन्हीं देशों से अमेरिका की दुश्मनी भी है। रूस और चीन बहुत ज्यादा ताकतवर हैं। इसलिए उनसे सीधा युद्ध में अमेरिका कभी नहीं जाता। लेकिन ये लोग समझते हैं कि ईरान अभी इनके कब्जे में आ सकता है। इसीलिए ईरान में हर मुमकिन कोशिश की जा रही है सत्ता बदलकर एक ऐसे शासक को लाने की है,जो ये बैंकिंग व्यवस्था ईरान में लागू कर दे और फिर ईरान इनकी व्यवस्था के नीचे आ जाए।
रो शील्ड परिवार का सिर्फ एक ही एजेंडा है पूरी दुनिया को अपने कंट्रोल में लाना।दुनिया की जनसंख्या को कम करना चाहते हैं कि दुनिया सिर्फ इनके वंश के अधीन रहे और इनकी सेवा करने के लिए कुछ लिए इन्होंने कुछ लोगों को चुन रखा है। बच्चे बूढ़ों को टीके लगवा कर दुनियाँ की जनसंख्या धीरे-धीरे कम करना चाहते हैं। कई देशों में युद्ध करवा कर मिटवा दिया। ये चाहते है कि दुनिया में इतना युद्ध करवा दिया जाए, कि फिर दुनिया की देशों की सरकारें लोग इनसे मांग करें कि भाई अब एक विश्व सरकार बन जानी चाहिए। अगर सरकारें अलग-अलग होंगी, तो ये युद्ध ऐसे ही होते रहेंगे। विश्व सरकार बन जाएगी तो दुनिया में युद्ध नहीं होगा।
ये यही चाहते हैं कि दुनिया इस बात पे सरेंडर कर दे। जिस प्रकार से आज WHO है। जिसने पूरी दुनिया को कोरोना कल में बता रहा था कि क्या करना है क्या क्या नहीं करना। एक संस्था पूरी दुनिया ले लिये बन गई थी। इसी तरह पूरी दुनिया में अनेकों विश्व संघटन UN, UNESCO, World Economic Forum, world bank, IMF, Unicef, बन गया ना कि दुनिया के मामले सुलटाया गया। सब इन्होंने बनवाई है। सारी संस्थाएं इन्होंने बनवाई है।Un बताता है क्या राजनीतिक आपको फैसले करने हैं। WHO बताता है आपको सेहत के मामले में क्या फैसले करने हैं। वर्ल्ड बैंक और आईएमएफ ये बताता है कि आपको कितना लोन हम देंगे। केंद्रीय संस्थाओं की तरह आगे एक विश्व सरकार बनाने की सच्चाई, नियति, सार्थकता, को समझना होगा।
No comments:
Post a Comment